हमारे बारे में

शिवशक्ति सेवा संस्थान एवं धर्मार्थ ट्रस्ट

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शिवशक्ति सेवा संस्थान एवं धर्मार्थ ट्रस्ट में आपका स्वागत है | हमारे पावन शास्त्र वेद उपनिषद ही हमारी संस्कृति के स्तम्भ व हमारे जीवन के प्रेरणा श्रोत हैं तथा इनका सारांश ही ज्योतिष है तथा भुत भावन शिव ही सभी कला के उत्पत्तिकर्ता है अतः उन्ही को साक्षी मानकर सामाजिक कल्याण व धर्म के रक्षार्थ आचार्य सत्यजीत पाण्डेय द्वारा ज्योतिष के क्षेत्र में आचार्य व धर्मशास्त्र के विषय में द्वयाचार्य की वृहद शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात 101 यज्ञं की पूर्ति व कन्याओं का सामूहिक विवाह आदि समस्त सामाजिक व धार्मिक उत्थान हेतु करने योग्य आयोजन हेतु कृतसंकल्पित होकर शिवशक्ति सेवा संस्थान एवं धमार्थ ट्रस्ट की स्थापना 2019 में की गई तथा प्रतिवर्ष जनकल्याण व धर्म के रक्षार्थ मंदिर निर्माण , विशाल यज्ञँ , भंडारा ,भागवत कथा ,रामकथा , अनुष्ठान , भजन संध्या व वृहद् धार्मिक व जनकल्याणकारी कार्यों को निरंतर किया जाता है तथा संस्था ऐसे कार्यों में आर्थिक व सभी प्रकार के सहायता आदि को करने हेतु कृतसंकल्पित है | शास्त्रों में कहा गया है की गुरु ब्राम्हण औषधि श्रद्धा अनुसार फल देते हैं अतः पुरे विश्वास के साथ हमारे संस्था के आचार्यों द्वारा ज्योतिष आदि के माध्यम से जनता की समस्या व उसका शास्त्रीय विधि से वैदिक उपाय बताया जाता है तथा सभी प्रकार के पूजन जप मन्त्र आदि की निशुल्क शिक्षा आचार्यों द्वारा दी जाती है तथा विधिपूर्वक उचित सलाह जुड़ने वाले सदस्य को निरंतर धर्म सम्बंधित कार्यों का उचित मार्गदर्शन दिया जाता है |

विजन

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" धर्मो रक्षति रक्षितः "| धर्म की हम रक्षा जब करेंगे तब धर्म हमारा रक्षा करेगा | शास्त्रों में कहा गया है- धीरज धरम मित्र अरु नारी | आपति काल परखिये चारी | हमारे संकट में उचित मार्ग की प्रेरणा हमारे शास्त्रों से ही मिलता है तथा संस्कार और संस्कृति ही हमारी रक्षा करते है हमारे पावन शास्त्र वेद उपनिषद ही हमारी संस्कृति के स्तम्भ व हमारे जीवन के प्रेरणा श्रोत हैं आज जीवन में सभी वर्ग के लोग परेशांन हैं क्योंकि हम संस्कार और संस्कृति को भूलते जा रहे है परिणाम है की हम सभी जीवन ,में विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं " इसी को ध्यान में रखते हुवे वैदिक उपाय व शास्त्रवत विधियों द्वारा लोगो में संस्कार व संकृति जागृत कर लोक कल्याण व वैदिक सभ्यता को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से के साथ साथ धर्म का प्रसार कर अपने शास्त्रों में छिपे विभिन्न औषधि कला व योग आदि का पुनर्जागरण कर लोगो को मानव जीवन का उद्देश्य बताना व लोककल्याण की शिक्षा प्रदान करना व वैदिक शिक्षा को माध्यम बनाकर सभी शिक्षा का यथार्थ ज्ञान प्रदान कराना

मिशन

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आदि काल से व शास्त्रों द्वारा ब्राम्हण, व अग्नि को पृथ्वी का साक्षात देवता माना गया है अतः हमारा कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण है तथा पूर्णतः धर्म कार्य के लिए कृतसंकल्पित इस संस्था से जुड़ने वाला हर ब्यक्ति अपनी समस्याओ में उचित मार्गदर्शन की अपेक्षा रखता है ऐसे में हम कभी अपने कर्तब्यों के प्रति लापरवाह नहीं हो सकते अतः हमारी हार्दिक इक्षा और उद्देश्य है की समस्त विश्व एक परिवार है और हमारा सभी परिवार हमसे जुड़कर जीवन में सुख शांति को आत्मसात करें और एक हो |

न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।
कामये दुःखताप्तानां प्राणिनाम् आर्तिनाशनम् ॥
अर्थ - ! मुझे न तो राज्य की कामना नही, स्वर्ग-सुख की चाहना है न हि मुक्ति की इच्छा है एकमात्र इच्छा यही है कि दुख से संतप्त प्राणियों का कष्ट समाप्त कर सके

हमारी सेवाएं

खुशी की तलाश में

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