सामूहिक पूजा / सामाजिक पूजा

ब्याक्तिगत पूजा की अपेक्षा सामूहिक पूजा का अत्यधिक लाभ होता है

शिवशक्ति सेवा संस्थान एवं धर्मार्थ ट्रस्ट

सामूहिक पूजा / सामाजिक पूजा

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ब्याक्तिगत पूजा की अपेक्षा सामूहिक पूजा का अत्यधिक लाभ होता है क्योंकि उसमे सभी वर्गों के साथ एक होकर आराधना किया जाता है फलस्वरूप किसी एक की आराधना भी सात्विक हुई तो उसका लाभ सभी को बराबर मिल जाता है तथा सामाजिक व सामूहिक रूप से पूजा करने से उस पूजन का लाभ जो भी ब्यक्ति प्राप्त करता है उसका सोलहवां अंश कर्ता को स्वयं प्राप्त होता है ऐसा शास्त्रों में वर्णन है मान्यताओं के अनुसार पारम्परिक व औपचारिक रूप से मंदिर या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर एकत्रित होकर पूजा समारोह में भाग लेने की क्रिया को सामूहिक पूजा ते हैं। कई धार्मिक सम्प्रदायों में इसका बहुत महत्व होता है समाज के हित में लोक कल्या णा र्थ व धर्म के रक्षार्थ व प्रसार हेतु जो भी यज्ञ , पूजन हवन कथा आदि जो भी ब्यक्ति कराता है उसके सारे मनोरथ पूर्ण होते है तथा जन्म जन्मान्तर तक सभी सुखों को को प्राप्त कर तीनो लोको में पूजनीय हो जाता है तथा देव ऋण से इस जन्म में ब्यक्ति उत्तीर्ण हो जाता है